Monday, September 25, 2017

कुएँ का मेंढक

कुएँ में कुछ मेंढक परिवार रहा करते थे..सभी बहुत ख़ुश थे चारों ओर गोल दीवार थी,पानी था ऊपर आसमान भी दिखता था गोल..बाप-दादा के ज़माने से सब वहीं खेलते खाते और आराम से वहीं ज़िंदगी बिता देते थेलेकिन एक नया बच्चा दुनिया में आया,उसके मन में कई सवाल थे..कुएँ से बाहर की दुनिया को लेकर..सब उसके सवाल टाल देते..पर जवाब तो चाहिए ही था..एक दिन सबसे छुपते-छुपाते वो मेंढक कुएँ से बाहर निकल गयादुनिया देखकर बहुत ख़ुश हुआ कई तरह के जीव-जंतु,खाने की चीज़ें सब मिली..कुछ देर ख़ुशी में तो सब भूल गया लेकिन घर की याद आयी..इधर कुएँ में सब परेशान थे..तभी वो मेंढक बस भागता हुआ वापस घर पहुँचा और सबको कुएँ से बाहर की दुनिया के बारे में बताने लगा..उसकी बहकी-बहकी बातों से सब हैरान हो गए..वैद्य से उसका इलाज करवाया गया..वो समझाता रहा कि बाहर की दुनिया कितनी अलग और अच्छी है..आख़िर  सब उसे पागल कहने लगे और ये बात कुएँ में फैल गयी कि बाहर जाने की वजह से उसकी ये हालत हुई है।बड़े मेंढक अपने काम में मशगूल थे और दूसरी ओर वो मेंढक सारे दिन बच्चों को बाहर की कहानियाँ सुनाता रहता..और बाहर जाने के सपने देखता और तो और कुछ बच्चे भी उसके साथ जाने को तैयार हो गए..बाक़ी मेंढकों को जैसे ही ये बात पता चली एक मीटिंग बुलाई गयी..उस मेंढक को बाग़ी और पागल घोषित किया गया..क़ैद में डाल दिया गया।

अगली सुबह वो मेंढक कुएँ में नहीं मिला..कुछ मेंढक बच्चे भी ग़ायब थे।बुज़ुर्ग मेंढकों ने कुँए से बाहर जा सकने के दरवाज़े बंद कर दिए..कुएँ में वापस पुरानी ख़ुशहाली गयी..कुछ बच्चे अब भी दबे स्वर में उस मेंढक को अपना हीरो मानते हैं और उसकी बनायी तस्वीर देखते हैं..वो किसी दिन बाहर की दुनिया में जाने का सपना देखते हैं,लेकिन वो अब किसी से बाहरी दुनिया के बारे में कोई सवाल नहीं पूछते।


कुँए का मेंढक बने रहना ही कभी फ़ायदेमंद हो जाएगा...सोचा ना था....

4 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (27-09-2017) को
    निमंत्रण बिन गई मैके, करें मां बाप अन्देखी-; चर्चामंच 2740
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. बहुत सिम्पल तरीके से ग़ज़ब की बात कही है। इससे सिम्पल तरीके से ये बात नहीं समझाई जा सकती। मस्त लिखा है

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